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Diwali

Lakshmi Ji Ki Aarti माँ लक्ष्मीजी की आरती Om Jai Laxmi Mata

Laxmi Ji Ki Aarti Om Jai Laxmi Mata

Laxmi Ji Ki Aarti

Lakshmi Ji Ki Aarti: Laxmi Mata aarti song played during the festival of Diwali.

मां लक्ष्मी धन और सौभागय की देवी हैं जिनके आशीर्वाद से घर में सुख-संपति बनी रहती है. मां लक्ष्‍मी के पूजन से घर में धन और वैभव बना रहता है. मां को प्रसन्‍न करने के लिए मां की आरती करना बहुत जरूरी होता है.

कोई भी पूजा तब तक अधूरी रहती है जब तक आरती नहीं होती। दीवाली भी इसका अपवाद नहीं है। इस पर्व पर मां लक्ष्मी और श्री गणेश की पूजा और आरती की जाती है।

लक्ष्मी जी की आरती में 16 पंक्तियां हैं। शक्ति तत्व की देवी होने से इन पंक्तियों को ऊंची राग के साथ मध्यम स्वर और मध्यम वेग में गाया जाना चाहिए। इस बात का ध्यान रहे कि आरती का उच्चारण शुद्ध होना चाहिए।

Lakshmi Ji Ki Aarti करने से पहले ये मंत्र बोलें :

या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी:
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि:।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा
तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम्॥

Lakshmi Ji Ki Aarti in Hindi

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

सब बोलो लक्ष्मी माता की जय, लक्ष्मी नारायण की जय।

आरती पूरी होने के बाद तुलसी में आरती जरूर दिखाना चाहिए, इसके बाद घर के लोगों को आरती लेनी चाहिए।

Laxmi Ji Ki Aarti
Laxmi Ji Ki Aarti

Lakshmi Ji Ki Aarti in English

Om Jai Lakshmi Mata,Maiya Jai Lakshmi Mata।
Tumako Nishidin Sevat,Hari Vishnu Vidhata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥

Uma Rama Brahmani,Tum Hi Jag-Mata।
Surya-Chandrama DhyavatNaarad Rishi Gata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥

Durga Roop Niranjani,Sukh Sampatti Data।
Jo Koi Tumako Dhyavat,Riddhi-Siddhi Dhan Pata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥

Tum Patal-Nivasini,Tum Hi Shubhdata।
Karma-Prabhav-Prakashini,Bhavanidhi Ki Trata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥

Jis Ghar Mein Tum Rahti,Sab Sadgun Aata।
Sab Sambhav Ho Jata,Man Nahi Ghabrata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥

Tum Bin Yagya Na Hote,Vastra Na Koi Pata।
Khan-Pan Ka Vaibhav,Sab Tumase Aata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥

Shubh-Gun Mandir Sundar,Kshirodadhi-Jata।
Ratna Chaturdash Tum Bin,Koi Nahi Pata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥

Mahalakshmi Ji Ki Aarti,Jo Koi Jan Gata।
Ur Anand Samata,Paap Utar Jata॥
Om Jai Lakshmi Mata॥

Download lakshmi ji ki aarti in pdf version.

लक्ष्मीजी की आरती का क्या है अर्थ?

श्री गणेश की आरती का संदेश है प्रेम और इससे लोगों के मन में सद्भाव और स्नेह का संचार होता है। वहीं लक्ष्मी जी की आरती का मतलब है कि संपदा का लाभ तभी होता है जब आप की सोच सकारात्मक हो और आप उसे कल्याण के लिए प्रयोग करें।

लक्ष्मीजी की आरती कैसे करें आरती ?

ऐसी मान्यता है कि बिना आरती के पूजा पूरी नहीं होती। पूजा की थाली में घी का दीया और कपूर जलाकर आरती की जाती है। गणेश जी की आरती कपूर जला कर और घी के दीये के साथ उनके चारों ओर घुमाते हुये आरती की जाती है। जबकि लक्ष्मी जी की आरती पूजा थाली में एक तेल या घी का दीपक रखकर गोल घेरे में करते है और बुराई को दूर करने और समृद्घि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

धन-वैभव की देवी लक्ष्मी जी को हिन्दू धर्म में आदि शक्ति का रूप माना जाता है। विष्णुप्रिया लक्ष्मी जी की श्रद्धा पूर्वक श्री आराधना करने से मनुष्य को धन और स्मृद्धि की प्राप्ति होती है। माता लक्ष्मी का नित ध्यान करने के लिए विभिन्न मंत्रों के साथ आरती का भी पाठ किया जाता है।

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